Saturday, August 26, 2017

हे प्रकृति माँ !

हे धरती !
तुम मुझे दो गज जमीं दो
कि मैं एक छोटा सा
घर बना सकूँ 

हे आकाश !
तुम मुझे छोटी सी बदली दो
कि मैं सिर छुपाने एक
छत डाल सकूँ 

हे  पवन !
तुम मुझे थोड़ी शुद्ध हवा दो
कि मैं अपनी सांसों को
सुकून दे सकूँ 
हे नदी !
तुम मुझे थोड़ा निर्मल जल दो
कि मैं स्वस्थ और निरोग
जीवन जी सकूँ 

हे इंद्रधनुष !
तुम मुझे थोड़े रंग दो 
कि मैं अपने जीवन में 
खुशियों के रंग भर सकूँ 

हे प्रकृति माँ !
मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि 
मैं तुम्हारी रक्षा करूँगा 
जिससे मैं सुकून भरा
जीवन जी सकूँ। 



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